रीवा जिले में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में फर्जी भुगतान का बड़ा घोटाला सामने आया है। रायपुर–भलुहा–मनगवां रोड, जिसका निर्माण एमपीआरडीसी के अधीन था, उसके नाम पर फर्जी मेजरमेंट बुक बनाकर एक करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान कर दिया गया। इस घोटाले में तत्कालीन कार्यपालन यंत्री केके गर्ग और एसडीओ ओंकार मिश्रा की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। चीफ इंजीनियर आर.एल. वर्मा ने मामले पर टिप्पणी से इंकार किया है।
सीधी जिले में लोक निर्माण विभाग की सड़कों में भ्रष्टाचार उजागर हुआ है। जांच में उपयंत्री प्रभाष श्रीवास्तव और सहायक यंत्री दोनों को दोषी पाया गया, लेकिन केवल उपयंत्री को निलंबित किया गया। सहायक यंत्री स्तुति गौतम पर कार्रवाई नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं। विधायक ने भी पहले उनकी शिकायत की थी। घटिया सड़क निर्माण और संविदाकारों से मिलीभगत के आरोप लगातार चर्चा में हैं।
सतना से बड़ी सेमरिया होते हुए प्रयागराज तक बनने वाली सड़क का हाल बेहाल है। गड्ढों में तब्दील यह मार्ग दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है। वर्षों से शिकायतों के बावजूद सीएम हेल्पलाइन भी औपचारिकता बनकर रह गई है। क्या जनता का भरोसा टूट रहा है?















